रविवार, 31 जुलाई 2016

Story

                                          * अमीर कौन * 
 सड़क किनारे एक छोटा सा लड़का खड़ा था । जिसने फटे-पुराने कपडे पहन रखे थे , उसके बाल बिखरे हुए थे और मेला सा चेहरा लेकिन उसकी आँखों में कुछ पाने की चाहत थी शायद वह भूखा था तभी पास में एक गाड़ी आकर रूकती है वह लड़का दौड़ कर उसके पास जाता है और अंदर बैठे आदमी से कहता हे - 
" बाबुजी दो दिन से कुछ नहीं खाया बहुत भूख लगी है कुछ खाने  को दिजियेना " 
वह आदमी उस पर ध्यान नहीं देता है और वहां से चला जाता है वह बच्चा निराश होकर वहाँ से चला जाता है थोड़ी देर बाद वहाँ दुसरी गाड़ी आकर रूकती है वह फिर दौड़ कर जाता है लेकिन इस बार भी खाली हाथ लौटता है कुछ देर इसी तरह चलने के बाद एक बड़ी गाड़ी आकर रूकती है वह गाड़ी किसी बहुत ही अमीर आदमी की है बच्चे के चेहरे पर उमीद की एक लहर दौड़ पड़ती है और वह दौड़कर उसके पास जाता है कार का सीसा खटखटाता है अंदर बैठा आदमी अपना सर बाहर निकालकर पुछता है- 
" क्या चाहिए " 
अब बच्चे को पुरा भरोसा हो जाता है की उसे कुछ खाने को मिलेगा वह उससे कहता है -
" साहब दो दिन से कुछ नहीं खाया कुछ खाने को दीजियेना " 
ये सुनकर वह आदमी उससे उलटे-सिधे सवाल करने लगता है लेकिन बच्चा फिर भी उमीद लगाये वहां खड़ा रहता है इससे उस आदमी को गुस्सा आ जाता है और वह उसको पीछे हटाने के लिये धीरे से धक्का देता है लेकिन बच्चे की हालत कमजोर होने से वह गिर जाता हे तभी अचानक एक बूढ़ा सन्यासी वहां आता है और उस बच्चे को उठाता है बच्चे को रोते हुए देख पुछता हे कि- 
" क्या हुआ बेटे तुम क्यों रो रहे हो "
वह बच्चा कहता है- 
" में दो दिन से भुखा हु " 
तभी वह सन्यासी अपने चोले में से दो रोटी निकाल कर उस बच्चे को देता है यह सब नजारा वह कार में बैठा व्यक्ति देखता है और शर्म से आँखे निची कर वहाँ से चला जाता है । 

"अमीर वो नहीं जिसके पास ऐसो-आराम की सभी चीजे हैं बल्कि वो है जिसके पास ये सब न होते हुए भी दूसरों का दुःख बांटता है "। 

शुक्रवार, 29 जुलाई 2016

तिरंगा

साथी अपना साथ है इतना ही , आज हम तो ले चले विदाई
गम नहीं है हमको , इस माटी कर्ज चुका दिया हमनें ।
जीते जी कुछ नहीं कर पाये , मरकर तिरंगा हथिया लिया हमने ॥


आज हमारा कर्तव्य पुरा हुआ बस , जिंदगी ने साथ छोड़ दिया
कुछ कर लिया देश के लिए बस , इसी बात पर नाज है ।
लगता है आज सीमा पर चारों ओर राष्ट्रगान की ही आवाज है ॥


देश की रक्षा का जो वचन लिया , उसे आज पुरा कर लिया हमनें ।
जीते जी कुछ नहीं कर पाये , मरकर तिरंगा हथिया लिया हमनें ॥


यह दिन भी कितना शुभ है , जो शहादत लेकर आया
पिता का सर ना शर्म से जुकाया , ना माँ का दुध हमनें लज्जाया ।
देश के लिए जिसनें अपना बलिदान कर दिया , उसी ने अमृत्व पाया ॥


अपनी जान लुटा के भी शहीदों की सूचि में अपना नाम लिखा लिया हमने ।
जीते जी कुछ नहीं कर पाये , मरकर तिरंगा हथिया लिया हमनें ॥

(कवि - सांवर मल जाट )

हिंदुस्तान के लोग

ये क्या करते हैं हिंदुस्तान के लोग । 
अपनी तो पता नहीं, ओरों की गलतियां देखते हैं लोग ॥ 


घर में एक पेड़ नहीं, फिर भी वन लगाने चलें हैं लोग । 
खुद करते है भ्रष्टाचार, फिर भी भ्रष्टाचार मिटाने चले हैं लोग ॥ 
" ये हिंदुस्तान के लोग "

अपनी बेटी जो कांटो में फसी है, उसे नहीं उठाते हैं लोग ।   
ओर बेटी बचाओ आन्दोलन चलाते हैं लोग ॥ 

अपने घर की बेटी को तो फेंक जाते हैं लोग । 
ओर लड़का-लड़की एक समान का नारा लगाते हैं लोग ॥ 
" ये हिंदुस्तान के लोग "

अपनी गाय को तो कत्लखाने पहुँचाते हैं लोग, 
ओर गाय बचाने का संदेश देते हैं लोग । 
गाय को अपनी माँ कहते हैं, ओर उसी माँ का मांस खाते हैं लोग ॥ 

अपने निज स्वार्थ के लिए,गाय को कत्लखाने पहुँचाते हैं लोग ।  
"ये हैं हिंदुस्तान के लोग "   "ये हैं हिंदुस्तान के लोग "

(कवि - सांवर मल जाट)

मंगलवार, 26 जुलाई 2016

पुकार (POEM)

पुकार


कर रहा हे तु परिश्रम , 
है तु हि इस धरती कि शान 
हे किसा - तु बड़ा महान   ॥ 


तेरे हि परिश्रम से , है धरती का श्रृंगार 
तु हि रह गया है , इस भूमि का आधार 
अपनी मेहनत और लगन से 
बंजर भूमि में भी लगा डाला तुने उध्यान 
हे किसा - तु बड़ा महान   ॥ 


करता है तु मेहनत , उगाता है तु अनाज 
फिर भी नहीं रहा आज ,तुझ पर किसी को नाज 
ओरों के लिए करता सब कुछ, तेरे लिए किसी ने नहीं किया कुछ 
ये कैसी विडम्बना है भगवान
हे किसा तु बड़ा महान  ॥ 


तु है इस भुमि का पुत्र, फिर भी नहीं सुनी तेरी किसी ने पुकार 
कब तक दबा रहेगा कर्ज में, कब तक सहेगा नेताओं का अत्याचार 
अब उठा के हत्यार, बन जा तु सीमा का जवान 
हे किसा तु बड़ा महान  ॥ 


कोंग्रेस हो बीजेपी हो या हो कोई सरकार 
तुझ पर होता रहा अत्याचार ,
तुने बनाया सबको अमीर इन्होंने तुझ ही बना डाला गरीब 
कर तु भी कुछ ऐसा, जिससे हो जाये इन की हालत खराब 
हे किसा तु बड़ा महान  ॥ 


अब भी तु नहीं जगा तो, डुबो देगी तुझको ये महंगाई 
फिर कैसे कर पायेगा तु अपनी ही बेटी की विदाई 
सुनो "सांवरिया" जय जवान जय किसान 
हे किसा तु बड़ा महान   ॥ 


(कवि - सांवर मल जाट)

मेरा हिन्दुस्थान (POEM)

* मेरा हिन्दुस्थान *







पैदा हुआ आर्यवृत बनकर , सुख और खुशहाली लाया था 
अपनों और परायों को इसने , सम्मान से रहना सिखाया था
विश्व में ज्ञान-ज्योति का दीप जलाया,तब ही यह विश्व गुरू कहलाया था ॥ 


जवान हुआ हिन्दुस्थान बनकर,अपने बाहुबल से दुनिया को जीना सिखाया था  
अपनी मेहनत और लग्न से खूब कमाया,अपने आविष्कारों से दुनिया को परिचित करवाया था 
इसने कठोर परिश्रम से अपार धन कमाया , तभी तो यह सोने कि चिड़िया कहलाया था ॥ 


अधेड़ हुआ भारत बनकर , बनते हि भारत ने सम्मान और सम्पति को खोया था 
नजर लगी नजाने किसकी , सब कुछ इसने गंवाया था 
मुगलों और अंग्रेजो का हुआ था जब ये गुलाम,डाली परतंत्रता ने इसके पैरो में जंजीरे 
अपनी सारी शक्ति , यश को खोकर ये बहुत रोया था ॥ 


बुढा हुआ इंडिया बनकर बेबस लाचार बनकर दुनिया के सामने आया 
इसकी जड़ो को अपनों ने हि काटा 
ज्ञान देनें वाला गुरू , आज स्वयं ज्ञान के लिए चिल्लाया 
कौन सहायता करने वाला  इसकी , अपनों ने हि जब इसको मार गिराया ॥ 


* जय हिंद *                                                                                * जय भारत *


(कवि - सांवर मल जाट )

सोमवार, 25 जुलाई 2016

                              
कहानी प्रेम की मौला, अक्सर छोटी क्यों बनाता है
जब तक समझते इसको , यह रिश्ता टूट जाता है । 
प्रेम तो पुजा है , इस जहाँ में मालुम हे हमको 
उस पुजा में विघ्न आखिर हर बार क्यों आता है ॥ 

(सन्नाटा )
                                             * गजल *

अपने  प्यार को तो मोला , सभी भगवान बताते हैं 
पूजते हे तब तक , जब तक ना धोखा खाते हैं 
 शिचते हैं वो दिपक खून से अपनी मोहबत का  
ऐसे दिवाने अक्षर हार कर भी जीत जाते हैं ॥ 

(कवि -सन्नाटा )
                                           * ऐ मेरे दिलदार *



ऐ मेरे दिलदार बता दे , क्या मुझसे प्यार नहीं 
दूर क्यों मुझसे इतना तु , क्या में तेरा यार नहीं 
ऐ मेरे दिलदार बता दे , क्या मुझसे प्यार नहीं ॥ 


झुठी थी तेरी सारी कसमें , क्या वो वादे याद नहीं 
रब से बढ़कर माना तुझको , क्या वो बातें याद नहीं
क्यों किया था इकरार , जो तेरे दिल में था प्यार नहीं                        
ऐ मेरे दिलदार बता दे , क्या मुझसे प्यार नहीं ॥ 


मोहबत का शीश महल था मेरा , जिसको तु तोड़ गई 
दिल भी तोड़ दिया तुने , मुझको अकेला छोड़ गई 
प्यार किया था मैंने तुझसे , कोई व्यापार नहीं 
ऐ मेरे दिलदार बता दे , क्या मुझसे प्यार नहीं 
दूर क्यों मुझसे इतना तु , क्या में तेरा यार नहीं ॥ 

(कवि - सांवर सन्नाटा )

रविवार, 24 जुलाई 2016


तेरी गलियों का मझनु हुँ , तेरी यादों का जुगनू 
तेरी मोहबत में पागल हुँ , तेरी अदाओं का गायल हुँ । 

सोचा जो यह पाया यार , जग में अक्षर ऐसा होता है  
जो जितना प्यार करता हे , वो उतना यार रोता है ॥ 


(सांवर  सन्नाटा )
तेरी तस्वीर से यारा तेरा दिदार करता हुँ , 
मोहबत हे तु मेरी तुझी पे यार मरता हुँ । 

तुमने तो थाम लिया हे किसी ओर का दामन ,
में हुँ पागल-दिवाना जो तुझी से प्यार करता हुँ । 


                                 " जन-जन ने लागे प्यारो राजस्थान "       






आडावन की महिमा गाउँ , कितरा-रा में दर्शन पाऊं 
देवा का गुण में गावां , रामदेवरा पैदल जावां 
गोगा-तेजा रो प्यारो रे थान ,जन जन ने लागे प्यारो राजस्थान ॥ 


राणा ने में सिमरण करा , पावन होगी ज्यासूं धरा 
हल्दी घाटी तीर्थ बड़ा , दुश्मन जटे आन खड़ा 
कितरा-रा होगिया ई पर बलिदान ,जन जन ने लागे प्यारो राजस्थान ॥


नारी थी वा पद्दमिनी हाला ,जिसने अंग लगाली ज्वाला 
नारी ही थी वा मीरा जाला ,जिसने पी लिया विष का प्याला
हाड़ी-कर्मा रो कितरो रे सम्मान ,जन जन ने लागे प्यारो राजस्थान ॥


चम्बल माही लूणी बनास , ई धरा की नदियां रे खास 
ऊँचा-नीचा डुंगर ई पर , बरखा कम ही होती जी पर 
इन्द्रा वाली नहरा सूं निपजे रे धान , जन जन ने लागे प्यारो राजस्थान ॥


(कवि - सांवर मल जाट )

                                                *  सावण  *



बरस बावली रेता में , आणंद करदे खेता में 
पहली-पहली बरखा वेगी , माटी की वा खुशबू आगि ॥ 


हळिया ले किसान चालिया , खेता में ही डेरा लांगिया 
मूंग मक्की मुफलिया भादी ,  गलिया खेत ग्वार ज्वार की धोरा लागि ॥ 


धरती ने तु स्वर्ग बना दे , कृषाणा को मनडो हरसादे
बीज बचिया ने हाथा में  
बरस बावली रेता में , आणंद करदे खेता में ॥   


कांई दिना सुं भुखा बैठा , गाय-रोजड़ा की भूख मिटबा लागि 
तितर-मोर विचरण लागिया , सांप-गोइरा दिखण लागिया ॥


सांप की छतरिया मोटी वेगि , सावण की डोकरिया फरबा लागि 
पालर पाणी लाया घाघर में , नाड़ा-खोचरा भरगिया छापर में ॥ 

डूंगर सारा हरिया वेगिया , गारा -छाळि  चरबा लागिया 
डेडका बोलिया राता में , 
बरस बावली रेता में , आणंद करदे खेता में ॥


(कवि - सांवर मल जाट )
                                                                 *महाराणा प्रताप *

ता राखे धर्म की ताहि राख करतार ,
इसी सोच से उठी मेवाड़ की तलवार । 
एकलिंग भी ले बैठे यहाँ पर अवतार ,
महाराणा के गुण गांवा में बारम्बार ।।


प्रथम नमन करता हुँ कुलदेवी बाण मात को ,
दुजा नमन करू मेवाड़ धणी एकलिंग नाथ को । 
आगे नमन करता हुँ हिंदुआ सूरज की जात को ,
जिन्होंने प्राणो से बढ़ कर माना अपनी बात को ।।


आजादी का दिवाना था वो राणा ,
मर मिटने को तत्पर था वो राणा । 
जंगल में रह कर भी सम्पन था वो राणा ,
घास की रोटी खाकर भी प्रसन्न था वो राणा ॥ 


मेवाड़ धरा पर गंगा की तेज धार था राणा ,
दुश्मन के लिए तेजधार तलवार था राणा ।
राजपूतो की बड़ी बड़ी भूलों का सुधार था राणा ,
इतिहास गवाह हे इस माटी पर अवतार था राणा ॥ 


विश्व को आजादी से जीने मरने का पाठ पढ़ा गया राणा ,
कष्ट सहे जंगल में रहे फिर भी आन बान बचा गया राणा । 
मातृ-भूमि हे सबसे प्यारी ये बात सभी को बता गया राणा ,
राजाओं का राजा था फिर भी घास की रोटी खा गया राणा ॥ 


राज तो सभी किया करते हे परंतु राज धर्म निभा गया राणा ,
मान सम्मान से जिया वो स्वाभिमान से जीना सिखा गया राणा । 
आजाद रहा वो आजादी का सही अर्थ सभी को बता गया राणा ,
यहाँ इस माटी के कण-कण को अपने खून से जोड़ गया राणा  ॥ 
  


(कवि -सांवर मल जाट )                                 

शनिवार, 23 जुलाई 2016

                                                  * हिन्दुस्तान नजर नहीं आता *

इंसान तो दिखता है पर ईमान नजर नहीं आता 
दुश्मन को जला दे वो हनुमान नजर नहीं आता ,
किस पर अभिमान करुँ, मेरा हिन्दुस्तान नजर नहीं आता  ।। 


उत्तर में हिमालय रोता पश्चिम का गुजरात जहर उगलता 
पूर्व में नक्सलवाद दक्षिण में माओवाद नजर आता ,
हर वस्तु में मिलावट आज इंसान पानी का दूध बनाता 
रिश्वत का बोलबाला हे कोई इसको मिटाने वाला नजर नहीं आता 
किस पर अभिमान करुँ, मेरा हिन्दुस्तान नजर नहीं आता  ।। 


गाँधी नेहरू और पटेल के आदर्शों को तो हम गवां बैठे 
भगतसिंह जैसे वीरों की कुर्बानी को भी हम भूला बैठे 
आजादी के सपनों को  तो धूल में मिला दिया हमनें 
तुच्छ स्वार्थ की खातिर देश से गधारी कर दी हमने 
अब तो हर जगह जनरल डायर नजर आता 
किस पर अभिमान करुँ, मेरा हिन्दुस्तान नजर नहीं आता  ।। 


अब हम भारतीय हैं पर अपने भाई के नहीं 
हम मानव तो हैं परन्तु अपने आदर्श मानवता के नहीं 
नार से जो नारी बना उस पर क्या अभिमान करुँ 
मेरा प्यारा तो हिन्दुस्तान था भारत पर क्या अभिमान करूँ 
आज मुझे कोई देश भक्त नजर नहीं आता 
किस पर अभिमान करुँ, मेरा हिन्दुस्तान नजर नहीं आता  ।।


नेता जी सी बोली कहाँ अब आजाद सी गोली कहाँ 
वो खून वाली होली कहाँ अब देश भक्तों की चोली कहाँ 
झांसी वाली कहानी कहाँ अब भगतसिंह सी जवानी कहाँ 
करुँ मेँ भारत माता का श्रृंगार अक्षर और रोली कहाँ 
आज मुझे कहीं पर भी वन्देमातरम का गान नजर नहीं आता 
किस पर अभिमान करुँ, मेरा हिन्दुस्तान नजर नहीं आता  ।।




(कवि - सांवर मल जाट )
                                                             * काश्मीर की पुकार *


काश्मीर जो धरती का स्वर्ग दिखाई देता था 
भारत माँ के सर का ताज दिखाई देता  था ,
खो गया है आज वो अपनी ही फूलों की घाटी में 
दुश्मन लात मार रहा हे भारत माँ की छाती में  ।।


47 के बटवारे ने 65 की आग में झोंक दिया 
71 की लड़ाई ने भी कारगिल को फूँक दिया ,
दिल्ली फिर भी कुम्भकरण की शैय्या पर सोई हे ,
देख दिल्ली की नाकामी धरती मैय्या रोई हे  ।।


क्यों शिमला समझौते को बार - बार दोहराते हो 
एक बार क्यों नहीं नया कोहराम करवाते हो , 
बहुत सह लिया अब एक संग्राम हो जाने दो 
उस नापाक को उसकी ओकात बताने दो   ।।


शहीदों के बच्चों की किलकारी सुनाई देती हे घरों में 
कितने ही शिमला जैसे समझौते जलते हे बारूदों के ढेरों में ,
आखिर दिल्ली का यह संयम क्यों नहीं टूट रहा 
सब्र का प्याला कब भरेगा जो पेंदे से फूट रहा  ।। 


(कवि - सांवर मल जाट )
                                                                * दर्द प्यार का *
प्रेम प्यार और स्नहे लता का,
कायल हु में उसकी अदा का ।
उसके प्यार में जीवन खोता हु,
अब भी उसकी याद में यारों
सिसक सिसक कर रोता हुँ ।।

                                           मझनु सा मैं पागल हु,
                                           रांझा सा मैं गायल हु 
                                           जी कर भी दुनिया छोड़ गया,
                                           उससे जब नाता तोड़ गया । 
                                           अब भी उसको भूल नहीं पाता हु,
                                           अब भी उसकी याद में यारों
                                            सिसक सिसक कर रोता हुँ  ।। 

उसकी याद सताए मुझको 
उसका प्यार मिटाए मुझको 
इतना प्यार है उससे मुझको,
उसकी याद में जागु यारों 
उसकी याद में सोता हु । 
अब भी उसकी याद में यारों 
सिसक सिसक कर रोता हुँ ।। 
                                             मैंने तो प्यार किया था तुझसे 
                                             अपना जीवन वार दिया था तुझपे
                                             वो तो मार गई थी मुझको पर, 
                                             उसके वादों की ख़ातिर जीता हुँ
                                             अपनी कसमों पर मरता हुँ । 
                                             अब  भी उसकी याद में यारों 
                                             सिसक सिसक कर रोता हुँ ।। 
मेरे प्यार कि कहानी तुझ से 
है बर्बाद मेरी जवानी तुझ से ,
कैसे समझाऊँ यारों उसको 
कितना दर्द मिला प्यार में मुझको । 
उस दर्द में ही जीवन पाता हुँ 
अब भी उसकी याद में यारों ,
सिसक सिसक कर रोता हुँ ।। 


(कवि  - सांवर मल जाट )                                                                                       (प्रकाशक - उमेश जाट )
Zindgi Me Sabse Zayada Dukh Kab Hota He?????

Jab Aap Apni Sabse Pyari cheej Kho Dete Ho.

Or Vo Hoti He   "MAA"
Aap Jo Chaho Vo Ban Sakte Ho ..........
Bas.......
Khud Par Atoot Visvash Hona Chihiye..

Hey.... Raahgir  Andhere Se Na Gabra
Kyunki Andhera Hoga Tabhi To Savera Hoga...

शुक्रवार, 15 जुलाई 2016

Insaan ko Samasiya se gabrana nahi chahiye...
Kyunki Har Samasiya ka HAL jarur Hota he
Apko to Bas Use Dhundna Matra he.
Ek Dard bhari DASTAN tab banya hoti he
Jab DIL Puri tarah Toot jata he.
Muje pata he ki aap MAHAN ho.
Lekin aap tab tak MAHAN nahi
Ban sakte jab tak aap KHUD par
Yakeen na karo.
Aap tab tak Jitte rahte he jab tak ki aap 
Khud haar na maan le.

Harta vahi he jo khuch karta he
Or Jitta vahi he jo haar kar bhi haar nahi manta.
Good evening friends
Hii Friends ...

Hey this is my first blog.
Umid He Apko Pasand Ayega ...


One. Behind Every Successful Man
          There's A Lot Of Unsuccessful Years.