* अमीर कौन *
सड़क किनारे एक छोटा सा लड़का खड़ा था । जिसने फटे-पुराने कपडे पहन रखे थे , उसके बाल बिखरे हुए थे और मेला सा चेहरा लेकिन उसकी आँखों में कुछ पाने की चाहत थी शायद वह भूखा था तभी पास में एक गाड़ी आकर रूकती है वह लड़का दौड़ कर उसके पास जाता है और अंदर बैठे आदमी से कहता हे -
" बाबुजी दो दिन से कुछ नहीं खाया बहुत भूख लगी है कुछ खाने को दिजियेना "
वह आदमी उस पर ध्यान नहीं देता है और वहां से चला जाता है वह बच्चा निराश होकर वहाँ से चला जाता है थोड़ी देर बाद वहाँ दुसरी गाड़ी आकर रूकती है वह फिर दौड़ कर जाता है लेकिन इस बार भी खाली हाथ लौटता है कुछ देर इसी तरह चलने के बाद एक बड़ी गाड़ी आकर रूकती है वह गाड़ी किसी बहुत ही अमीर आदमी की है बच्चे के चेहरे पर उमीद की एक लहर दौड़ पड़ती है और वह दौड़कर उसके पास जाता है कार का सीसा खटखटाता है अंदर बैठा आदमी अपना सर बाहर निकालकर पुछता है-
" क्या चाहिए "
अब बच्चे को पुरा भरोसा हो जाता है की उसे कुछ खाने को मिलेगा वह उससे कहता है -
" साहब दो दिन से कुछ नहीं खाया कुछ खाने को दीजियेना "
ये सुनकर वह आदमी उससे उलटे-सिधे सवाल करने लगता है लेकिन बच्चा फिर भी उमीद लगाये वहां खड़ा रहता है इससे उस आदमी को गुस्सा आ जाता है और वह उसको पीछे हटाने के लिये धीरे से धक्का देता है लेकिन बच्चे की हालत कमजोर होने से वह गिर जाता हे तभी अचानक एक बूढ़ा सन्यासी वहां आता है और उस बच्चे को उठाता है बच्चे को रोते हुए देख पुछता हे कि-
" क्या हुआ बेटे तुम क्यों रो रहे हो "
वह बच्चा कहता है-
" में दो दिन से भुखा हु "
तभी वह सन्यासी अपने चोले में से दो रोटी निकाल कर उस बच्चे को देता है यह सब नजारा वह कार में बैठा व्यक्ति देखता है और शर्म से आँखे निची कर वहाँ से चला जाता है ।
"अमीर वो नहीं जिसके पास ऐसो-आराम की सभी चीजे हैं बल्कि वो है जिसके पास ये सब न होते हुए भी दूसरों का दुःख बांटता है "।
सड़क किनारे एक छोटा सा लड़का खड़ा था । जिसने फटे-पुराने कपडे पहन रखे थे , उसके बाल बिखरे हुए थे और मेला सा चेहरा लेकिन उसकी आँखों में कुछ पाने की चाहत थी शायद वह भूखा था तभी पास में एक गाड़ी आकर रूकती है वह लड़का दौड़ कर उसके पास जाता है और अंदर बैठे आदमी से कहता हे -
" बाबुजी दो दिन से कुछ नहीं खाया बहुत भूख लगी है कुछ खाने को दिजियेना "
वह आदमी उस पर ध्यान नहीं देता है और वहां से चला जाता है वह बच्चा निराश होकर वहाँ से चला जाता है थोड़ी देर बाद वहाँ दुसरी गाड़ी आकर रूकती है वह फिर दौड़ कर जाता है लेकिन इस बार भी खाली हाथ लौटता है कुछ देर इसी तरह चलने के बाद एक बड़ी गाड़ी आकर रूकती है वह गाड़ी किसी बहुत ही अमीर आदमी की है बच्चे के चेहरे पर उमीद की एक लहर दौड़ पड़ती है और वह दौड़कर उसके पास जाता है कार का सीसा खटखटाता है अंदर बैठा आदमी अपना सर बाहर निकालकर पुछता है-
" क्या चाहिए "
अब बच्चे को पुरा भरोसा हो जाता है की उसे कुछ खाने को मिलेगा वह उससे कहता है -
" साहब दो दिन से कुछ नहीं खाया कुछ खाने को दीजियेना "
ये सुनकर वह आदमी उससे उलटे-सिधे सवाल करने लगता है लेकिन बच्चा फिर भी उमीद लगाये वहां खड़ा रहता है इससे उस आदमी को गुस्सा आ जाता है और वह उसको पीछे हटाने के लिये धीरे से धक्का देता है लेकिन बच्चे की हालत कमजोर होने से वह गिर जाता हे तभी अचानक एक बूढ़ा सन्यासी वहां आता है और उस बच्चे को उठाता है बच्चे को रोते हुए देख पुछता हे कि-
" क्या हुआ बेटे तुम क्यों रो रहे हो "
वह बच्चा कहता है-
" में दो दिन से भुखा हु "
तभी वह सन्यासी अपने चोले में से दो रोटी निकाल कर उस बच्चे को देता है यह सब नजारा वह कार में बैठा व्यक्ति देखता है और शर्म से आँखे निची कर वहाँ से चला जाता है ।
"अमीर वो नहीं जिसके पास ऐसो-आराम की सभी चीजे हैं बल्कि वो है जिसके पास ये सब न होते हुए भी दूसरों का दुःख बांटता है "।




