ये क्या करते हैं हिंदुस्तान के लोग ।
अपनी तो पता नहीं, ओरों की गलतियां देखते हैं लोग ॥
घर में एक पेड़ नहीं, फिर भी वन लगाने चलें हैं लोग ।
खुद करते है भ्रष्टाचार, फिर भी भ्रष्टाचार मिटाने चले हैं लोग ॥
" ये हिंदुस्तान के लोग "
अपनी बेटी जो कांटो में फसी है, उसे नहीं उठाते हैं लोग ।
ओर बेटी बचाओ आन्दोलन चलाते हैं लोग ॥
अपने घर की बेटी को तो फेंक जाते हैं लोग ।
ओर लड़का-लड़की एक समान का नारा लगाते हैं लोग ॥
" ये हिंदुस्तान के लोग "
अपनी गाय को तो कत्लखाने पहुँचाते हैं लोग,
ओर गाय बचाने का संदेश देते हैं लोग ।
गाय को अपनी माँ कहते हैं, ओर उसी माँ का मांस खाते हैं लोग ॥
अपने निज स्वार्थ के लिए,गाय को कत्लखाने पहुँचाते हैं लोग ।
"ये हैं हिंदुस्तान के लोग " "ये हैं हिंदुस्तान के लोग "
(कवि - सांवर मल जाट)
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