शुक्रवार, 29 जुलाई 2016

तिरंगा

साथी अपना साथ है इतना ही , आज हम तो ले चले विदाई
गम नहीं है हमको , इस माटी कर्ज चुका दिया हमनें ।
जीते जी कुछ नहीं कर पाये , मरकर तिरंगा हथिया लिया हमने ॥


आज हमारा कर्तव्य पुरा हुआ बस , जिंदगी ने साथ छोड़ दिया
कुछ कर लिया देश के लिए बस , इसी बात पर नाज है ।
लगता है आज सीमा पर चारों ओर राष्ट्रगान की ही आवाज है ॥


देश की रक्षा का जो वचन लिया , उसे आज पुरा कर लिया हमनें ।
जीते जी कुछ नहीं कर पाये , मरकर तिरंगा हथिया लिया हमनें ॥


यह दिन भी कितना शुभ है , जो शहादत लेकर आया
पिता का सर ना शर्म से जुकाया , ना माँ का दुध हमनें लज्जाया ।
देश के लिए जिसनें अपना बलिदान कर दिया , उसी ने अमृत्व पाया ॥


अपनी जान लुटा के भी शहीदों की सूचि में अपना नाम लिखा लिया हमने ।
जीते जी कुछ नहीं कर पाये , मरकर तिरंगा हथिया लिया हमनें ॥

(कवि - सांवर मल जाट )

हिंदुस्तान के लोग

ये क्या करते हैं हिंदुस्तान के लोग । 
अपनी तो पता नहीं, ओरों की गलतियां देखते हैं लोग ॥ 


घर में एक पेड़ नहीं, फिर भी वन लगाने चलें हैं लोग । 
खुद करते है भ्रष्टाचार, फिर भी भ्रष्टाचार मिटाने चले हैं लोग ॥ 
" ये हिंदुस्तान के लोग "

अपनी बेटी जो कांटो में फसी है, उसे नहीं उठाते हैं लोग ।   
ओर बेटी बचाओ आन्दोलन चलाते हैं लोग ॥ 

अपने घर की बेटी को तो फेंक जाते हैं लोग । 
ओर लड़का-लड़की एक समान का नारा लगाते हैं लोग ॥ 
" ये हिंदुस्तान के लोग "

अपनी गाय को तो कत्लखाने पहुँचाते हैं लोग, 
ओर गाय बचाने का संदेश देते हैं लोग । 
गाय को अपनी माँ कहते हैं, ओर उसी माँ का मांस खाते हैं लोग ॥ 

अपने निज स्वार्थ के लिए,गाय को कत्लखाने पहुँचाते हैं लोग ।  
"ये हैं हिंदुस्तान के लोग "   "ये हैं हिंदुस्तान के लोग "

(कवि - सांवर मल जाट)