कहानी प्रेम की मौला, अक्सर छोटी क्यों बनाता है जब तक समझते इसको , यह रिश्ता टूट जाता है । प्रेम तो पुजा है , इस जहाँ में मालुम हे हमको उस पुजा में विघ्न आखिर हर बार क्यों आता है ॥ (सन्नाटा )
* गजल * अपने प्यार को तो मोला , सभी भगवान बताते हैं पूजते हे तब तक , जब तक ना धोखा खाते हैं शिचते हैं वो दिपक खून से अपनी मोहबत का ऐसे दिवाने अक्षर हार कर भी जीत जाते हैं ॥ (कवि -सन्नाटा )
* ऐ मेरे दिलदार *
ऐ मेरे दिलदार बता दे , क्या मुझसे प्यार नहीं दूर क्यों मुझसे इतना तु , क्या में तेरा यार नहीं ऐ मेरे दिलदार बता दे , क्या मुझसे प्यार नहीं ॥ झुठी थी तेरी सारी कसमें , क्या वो वादे याद नहीं रब से बढ़कर माना तुझको , क्या वो बातें याद नहीं क्यों किया था इकरार , जो तेरे दिल में था प्यार नहीं ऐ मेरे दिलदार बता दे , क्या मुझसे प्यार नहीं ॥ मोहबत का शीश महल था मेरा , जिसको तु तोड़ गई दिल भी तोड़ दिया तुने , मुझको अकेला छोड़ गई प्यार किया था मैंने तुझसे , कोई व्यापार नहीं ऐ मेरे दिलदार बता दे , क्या मुझसे प्यार नहीं दूर क्यों मुझसे इतना तु , क्या में तेरा यार नहीं ॥ (कवि - सांवर सन्नाटा )