* हिन्दुस्तान नजर नहीं आता *
इंसान तो दिखता है पर ईमान नजर नहीं आता
दुश्मन को जला दे वो हनुमान नजर नहीं आता ,
किस पर अभिमान करुँ, मेरा हिन्दुस्तान नजर नहीं आता ।।
उत्तर में हिमालय रोता पश्चिम का गुजरात जहर उगलता
पूर्व में नक्सलवाद दक्षिण में माओवाद नजर आता ,
हर वस्तु में मिलावट आज इंसान पानी का दूध बनाता
रिश्वत का बोलबाला हे कोई इसको मिटाने वाला नजर नहीं आता
किस पर अभिमान करुँ, मेरा हिन्दुस्तान नजर नहीं आता ।।
गाँधी नेहरू और पटेल के आदर्शों को तो हम गवां बैठे
भगतसिंह जैसे वीरों की कुर्बानी को भी हम भूला बैठे
आजादी के सपनों को तो धूल में मिला दिया हमनें
तुच्छ स्वार्थ की खातिर देश से गधारी कर दी हमने
अब तो हर जगह जनरल डायर नजर आता
किस पर अभिमान करुँ, मेरा हिन्दुस्तान नजर नहीं आता ।।
अब हम भारतीय हैं पर अपने भाई के नहीं
हम मानव तो हैं परन्तु अपने आदर्श मानवता के नहीं
नार से जो नारी बना उस पर क्या अभिमान करुँ
मेरा प्यारा तो हिन्दुस्तान था भारत पर क्या अभिमान करूँ
आज मुझे कोई देश भक्त नजर नहीं आता
किस पर अभिमान करुँ, मेरा हिन्दुस्तान नजर नहीं आता ।।
नेता जी सी बोली कहाँ अब आजाद सी गोली कहाँ
वो खून वाली होली कहाँ अब देश भक्तों की चोली कहाँ
झांसी वाली कहानी कहाँ अब भगतसिंह सी जवानी कहाँ
करुँ मेँ भारत माता का श्रृंगार अक्षर और रोली कहाँ
आज मुझे कहीं पर भी वन्देमातरम का गान नजर नहीं आता
किस पर अभिमान करुँ, मेरा हिन्दुस्तान नजर नहीं आता ।।
(कवि - सांवर मल जाट )
इंसान तो दिखता है पर ईमान नजर नहीं आता
दुश्मन को जला दे वो हनुमान नजर नहीं आता ,
किस पर अभिमान करुँ, मेरा हिन्दुस्तान नजर नहीं आता ।।
उत्तर में हिमालय रोता पश्चिम का गुजरात जहर उगलता
पूर्व में नक्सलवाद दक्षिण में माओवाद नजर आता ,
हर वस्तु में मिलावट आज इंसान पानी का दूध बनाता
रिश्वत का बोलबाला हे कोई इसको मिटाने वाला नजर नहीं आता
किस पर अभिमान करुँ, मेरा हिन्दुस्तान नजर नहीं आता ।।
गाँधी नेहरू और पटेल के आदर्शों को तो हम गवां बैठे
भगतसिंह जैसे वीरों की कुर्बानी को भी हम भूला बैठे
आजादी के सपनों को तो धूल में मिला दिया हमनें
तुच्छ स्वार्थ की खातिर देश से गधारी कर दी हमने
अब तो हर जगह जनरल डायर नजर आता
किस पर अभिमान करुँ, मेरा हिन्दुस्तान नजर नहीं आता ।।
अब हम भारतीय हैं पर अपने भाई के नहीं
हम मानव तो हैं परन्तु अपने आदर्श मानवता के नहीं
नार से जो नारी बना उस पर क्या अभिमान करुँ
मेरा प्यारा तो हिन्दुस्तान था भारत पर क्या अभिमान करूँ
आज मुझे कोई देश भक्त नजर नहीं आता
किस पर अभिमान करुँ, मेरा हिन्दुस्तान नजर नहीं आता ।।
नेता जी सी बोली कहाँ अब आजाद सी गोली कहाँ
वो खून वाली होली कहाँ अब देश भक्तों की चोली कहाँ
झांसी वाली कहानी कहाँ अब भगतसिंह सी जवानी कहाँ
करुँ मेँ भारत माता का श्रृंगार अक्षर और रोली कहाँ
आज मुझे कहीं पर भी वन्देमातरम का गान नजर नहीं आता
किस पर अभिमान करुँ, मेरा हिन्दुस्तान नजर नहीं आता ।।
(कवि - सांवर मल जाट )
