प्रेम प्यार और स्नहे लता का,
कायल हु में उसकी अदा का ।
उसके प्यार में जीवन खोता हु,
अब भी उसकी याद में यारों
सिसक सिसक कर रोता हुँ ।।
मझनु सा मैं पागल हु,
रांझा सा मैं गायल हु
जी कर भी दुनिया छोड़ गया,
उससे जब नाता तोड़ गया ।
अब भी उसको भूल नहीं पाता हु,
अब भी उसकी याद में यारों
सिसक सिसक कर रोता हुँ ।।
उसकी याद सताए मुझको
उसका प्यार मिटाए मुझको
इतना प्यार है उससे मुझको,
उसकी याद में जागु यारों
उसकी याद में सोता हु ।
अब भी उसकी याद में यारों
सिसक सिसक कर रोता हुँ ।।
मैंने तो प्यार किया था तुझसे
अपना जीवन वार दिया था तुझपे
वो तो मार गई थी मुझको पर,
उसके वादों की ख़ातिर जीता हुँ
अपनी कसमों पर मरता हुँ ।
अब भी उसकी याद में यारों
सिसक सिसक कर रोता हुँ ।।
मेरे प्यार कि कहानी तुझ से
है बर्बाद मेरी जवानी तुझ से ,
कैसे समझाऊँ यारों उसको
कितना दर्द मिला प्यार में मुझको ।
उस दर्द में ही जीवन पाता हुँ
अब भी उसकी याद में यारों ,
सिसक सिसक कर रोता हुँ ।।
(कवि - सांवर मल जाट ) (प्रकाशक - उमेश जाट )
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