* गजल *
अपने प्यार को तो मोला , सभी भगवान बताते हैं
पूजते हे तब तक , जब तक ना धोखा खाते हैं
शिचते हैं वो दिपक खून से अपनी मोहबत का
ऐसे दिवाने अक्षर हार कर भी जीत जाते हैं ॥
(कवि -सन्नाटा )
अपने प्यार को तो मोला , सभी भगवान बताते हैं
पूजते हे तब तक , जब तक ना धोखा खाते हैं
शिचते हैं वो दिपक खून से अपनी मोहबत का
ऐसे दिवाने अक्षर हार कर भी जीत जाते हैं ॥
(कवि -सन्नाटा )
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