सोमवार, 25 जुलाई 2016

                                             * गजल *

अपने  प्यार को तो मोला , सभी भगवान बताते हैं 
पूजते हे तब तक , जब तक ना धोखा खाते हैं 
 शिचते हैं वो दिपक खून से अपनी मोहबत का  
ऐसे दिवाने अक्षर हार कर भी जीत जाते हैं ॥ 

(कवि -सन्नाटा )

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