शुक्रवार, 29 जुलाई 2016

तिरंगा

साथी अपना साथ है इतना ही , आज हम तो ले चले विदाई
गम नहीं है हमको , इस माटी कर्ज चुका दिया हमनें ।
जीते जी कुछ नहीं कर पाये , मरकर तिरंगा हथिया लिया हमने ॥


आज हमारा कर्तव्य पुरा हुआ बस , जिंदगी ने साथ छोड़ दिया
कुछ कर लिया देश के लिए बस , इसी बात पर नाज है ।
लगता है आज सीमा पर चारों ओर राष्ट्रगान की ही आवाज है ॥


देश की रक्षा का जो वचन लिया , उसे आज पुरा कर लिया हमनें ।
जीते जी कुछ नहीं कर पाये , मरकर तिरंगा हथिया लिया हमनें ॥


यह दिन भी कितना शुभ है , जो शहादत लेकर आया
पिता का सर ना शर्म से जुकाया , ना माँ का दुध हमनें लज्जाया ।
देश के लिए जिसनें अपना बलिदान कर दिया , उसी ने अमृत्व पाया ॥


अपनी जान लुटा के भी शहीदों की सूचि में अपना नाम लिखा लिया हमने ।
जीते जी कुछ नहीं कर पाये , मरकर तिरंगा हथिया लिया हमनें ॥

(कवि - सांवर मल जाट )

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