" जन-जन ने लागे प्यारो राजस्थान "
आडावन की महिमा गाउँ , कितरा-रा में दर्शन पाऊं
देवा का गुण में गावां , रामदेवरा पैदल जावां
गोगा-तेजा रो प्यारो रे थान ,जन जन ने लागे प्यारो राजस्थान ॥
राणा ने में सिमरण करा , पावन होगी ज्यासूं धरा
हल्दी घाटी तीर्थ बड़ा , दुश्मन जटे आन खड़ा
कितरा-रा होगिया ई पर बलिदान ,जन जन ने लागे प्यारो राजस्थान ॥
नारी थी वा पद्दमिनी हाला ,जिसने अंग लगाली ज्वाला
नारी ही थी वा मीरा जाला ,जिसने पी लिया विष का प्याला
हाड़ी-कर्मा रो कितरो रे सम्मान ,जन जन ने लागे प्यारो राजस्थान ॥
चम्बल माही लूणी बनास , ई धरा की नदियां रे खास
ऊँचा-नीचा डुंगर ई पर , बरखा कम ही होती जी पर
इन्द्रा वाली नहरा सूं निपजे रे धान , जन जन ने लागे प्यारो राजस्थान ॥
(कवि - सांवर मल जाट )
आडावन की महिमा गाउँ , कितरा-रा में दर्शन पाऊं
देवा का गुण में गावां , रामदेवरा पैदल जावां
गोगा-तेजा रो प्यारो रे थान ,जन जन ने लागे प्यारो राजस्थान ॥
राणा ने में सिमरण करा , पावन होगी ज्यासूं धरा
हल्दी घाटी तीर्थ बड़ा , दुश्मन जटे आन खड़ा
कितरा-रा होगिया ई पर बलिदान ,जन जन ने लागे प्यारो राजस्थान ॥
नारी थी वा पद्दमिनी हाला ,जिसने अंग लगाली ज्वाला
नारी ही थी वा मीरा जाला ,जिसने पी लिया विष का प्याला
हाड़ी-कर्मा रो कितरो रे सम्मान ,जन जन ने लागे प्यारो राजस्थान ॥
चम्बल माही लूणी बनास , ई धरा की नदियां रे खास
ऊँचा-नीचा डुंगर ई पर , बरखा कम ही होती जी पर
इन्द्रा वाली नहरा सूं निपजे रे धान , जन जन ने लागे प्यारो राजस्थान ॥
(कवि - सांवर मल जाट )

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें