रविवार, 24 जुलाई 2016

                                 " जन-जन ने लागे प्यारो राजस्थान "       






आडावन की महिमा गाउँ , कितरा-रा में दर्शन पाऊं 
देवा का गुण में गावां , रामदेवरा पैदल जावां 
गोगा-तेजा रो प्यारो रे थान ,जन जन ने लागे प्यारो राजस्थान ॥ 


राणा ने में सिमरण करा , पावन होगी ज्यासूं धरा 
हल्दी घाटी तीर्थ बड़ा , दुश्मन जटे आन खड़ा 
कितरा-रा होगिया ई पर बलिदान ,जन जन ने लागे प्यारो राजस्थान ॥


नारी थी वा पद्दमिनी हाला ,जिसने अंग लगाली ज्वाला 
नारी ही थी वा मीरा जाला ,जिसने पी लिया विष का प्याला
हाड़ी-कर्मा रो कितरो रे सम्मान ,जन जन ने लागे प्यारो राजस्थान ॥


चम्बल माही लूणी बनास , ई धरा की नदियां रे खास 
ऊँचा-नीचा डुंगर ई पर , बरखा कम ही होती जी पर 
इन्द्रा वाली नहरा सूं निपजे रे धान , जन जन ने लागे प्यारो राजस्थान ॥


(कवि - सांवर मल जाट )

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